मुलेठी (Licorice Root / Glycyrrhiza glabra): प्रकृति की मीठी औषधि – लाभ, उपयोग विधि, सावधानियाँ और दुष्प्रभाव

मुलेठी (वैज्ञानिक नाम: Glycyrrhiza glabra Linn.) फैबेसी कुल की एक बारहमासी जड़ी-बूटी है। इसके मूल (Rhizome और Root) में ग्लाइसिराइज़िन (Glycyrrhizin), ग्लाइसिराइज़िक एसिड, फ्लेवोनॉइड्स, आइसोफ्लेवोन्स और क्यूमेस्टैन जैसे सक्रिय घटक पाए जाते हैं। यह स्वाद में बहुत मीठी होती है – चीनी से 50 गुना अधिक मीठी। आयुर्वेद में इसे “यष्टिमधु” भी कहा जाता है और इसे मधुर, शीत वीर्य, बल्य, कफ-पित्तशामक और रसायन माना गया है।

मुलेठी से उपचारित होने वाले प्रमुख रोग और लक्षण

आयुर्वेदिक और आधुनिक पारम्परिक चिकित्सा के अनुसार मुलेठी निम्नलिखित स्थितियों में लाभकारी पाई गई है:

  • श्वसन तंत्र के रोग
    • सूखी और बलगमी खाँसी
    • गले में खराश, स्वरभेद (आवाज बैठना)
    • अस्थमा और ब्रॉंकाइटिस में सहायक
    • फेफड़ों की सूजन और इन्फ्लुएंजा के लक्षणों में राहत
  • पाचन तंत्र के रोग
    • अम्लपित्त (हाइपरएसिडिटी), गैस्ट्रिक अल्सर और डुओडिनल अल्सर
    • कब्ज (मृदु विरेचक के रूप में)
    • आंतरिक सूजन और अल्सरेटिव कोलाइटिस में सहायक
  • त्वचा रोग
    • एग्जिमा, सोरायसिस, खुजली और घाव भरने में
    • सूर्य की किरणों से त्वचा की जलन में राहत
  • महिलाओं के स्वास्थ्य में
    • पीसीओडी और मेनोपॉज के लक्षणों (हॉट फ्लैशेस) में सहायक
    • हल्के इस्ट्रोजन जैसे प्रभाव के कारण हार्मोनल असंतुलन में
  • अन्य
    • मुंह के छाले (स्टामेटाइटिस)
    • एडिसन रोग जैसे स्थितियों में सहायक (कॉर्टिसोल जैसा प्रभाव)
    • एंटी-वायरल और इम्यूनिटी बढ़ाने में

मुलेठी का उपयोग कैसे करें? (सुरक्षित मात्रा और विधियाँ)

आयुर्वेदिक ग्रंथों और AYUSH दिशानिर्देशों के अनुसार निम्न विधियाँ प्रचलित हैं:

  • चूर्ण: 3–6 ग्राम प्रतिदिन (1–2 चम्मच)
  • क्वाथ (काढ़ा): 5–10 ग्राम मूल को 200 मि.ली. पानी में उबालकर आधा रहने पर छान लें। दिन में 2 बार।
  • चाय: मुलेठी की जड़ का टुकड़ा + अदरक + तुलसी उबालकर पी सकते हैं।
  • मुलेठी घी: घी में मुलेठी चूर्ण मिलाकर गले की खराश में चाटें।
  • डिग्लिसिराइज़ेटेड लिकोरिस (DGL): अल्सर के मरीजों के लिए सुरक्षित विकल्प (ग्लाइसिराइज़िन निकाला हुआ)।

मुलेठी की सावधानियाँ और प्रतिबंध (जब नहीं लेनी चाहिए)

मुलेठी के ग्लाइसिराइज़िन के कारण लंबे समय तक या अधिक मात्रा में सेवन से निम्न जोखिम हो सकते हैं:

  • हाइपोकलेमिया (पोटैशियम की कमी) → मांसपेशियों में कमजोरी, ऐंठन
  • सोडियम और जल का संग्रह → उच्च रक्तचाप, पैरों में सूजन, चेहरे पर सूजन
  • स्यूडोएल्डोस्टेरोनिज़्म → कॉर्टिसोल और एल्डोस्टेरोन जैसा प्रभाव
  • हृदय संबंधी जोखिम → अनियमित हृदय गति (विशेषकर पहले से हृदय रोगी)

पूर्ण प्रतिबंधित स्थितियाँ

  • गर्भावस्था और स्तनपान (गर्भपात का जोखिम और शिशु पर प्रभाव)
  • उच्च रक्तचाप के रोगी
  • किडनी रोग (CKD), लिवर सिरोसिस
  • हाइपोकलेमिया या डाइयुरेटिक दवाएँ लेने वाले
  • कॉर्टिकोस्टेरॉइड दवाएँ लेने वाले (इंटरैक्शन का खतरा)

सुरक्षित अवधि: सामान्य व्यक्ति 4–6 सप्ताह से अधिक निरंतर न लें। हर 6 सप्ताह बाद कम से कम 2 सप्ताह का अंतराल रखें।

एलर्जी और दुष्प्रभाव

  • दुर्लभ मामलों में त्वचा पर चकत्ते, खुजली, साँस लेने में तकलीफ (एनाफिलेक्सिस)
  • सिरदर्द, थकान, मासिक धर्म में अनियमितता (महिलाओं में)
  • पुरुषों में लंबे सेवन से टेस्टोस्टेरोन कम हो सकता है → यौन इच्छा में कमी

विशेष चेतावनी

  • हमेशा चिकित्सक या आयुर्वेदाचार्य की सलाह से ही लें।
  • बाजार में मिलने वाली मुलेठी कैंडी या चाय में कभी-कभी बहुत अधिक मात्रा हो सकती है – सावधानी बरतें।
  • पोटैशियम युक्त आहार (केला, पालक) साथ में लेने से हाइपोकलेमिया का जोखिम कम होता है।

निष्कर्ष

मुलेठी प्रकृति द्वारा दिया गया एक अनमोल उपहार है जो सही मात्रा और सही तरीके से लिया जाए तो अनेक रोगों में लाभ पहुँचाती है। लेकिन इसके मीठे स्वाद के कारण लोग अक्सर अधिक मात्रा ले लेते हैं, जो खतरनाक सिद्ध हो सकता है। इसलिए “थोड़ा-थोड़ा, पर नियमित और चिकित्सक की देख-रेख में” ही इसका सेवन करें।

संदर्भ स्रोत:

  1. आयुष मंत्रालय, भारत सरकार – आयुर्वेदिक फार्माकोपिया ऑफ इंडिया, भाग-1, खंड-1 (Yashtimadhu Monograph)
    https://ayush.gov.in
  2. Central Council for Research in Ayurvedic Sciences (CCRAS) – Database on Medicinal Plants Used in Ayurveda
    http://ccras.nic.in
  3. National Center for Complementary and Integrative Health (NCCIH) – Licorice Root (अंग्रेजी में विस्तृत सुरक्षा जानकारी)
    https://www.nccih.nih.gov/health/licorice-root

नोट: इस लेख में दी गई जानकारी केवल संदर्भ के लिए है। कोई भी उपचार शुरू करने से पहले, खासकर हर्बल उपचार या जीवनशैली में बदलाव करने से पहले, हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।

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