भारत में हर साल लगभग 1.2–1.4 लाख नए मामले मुँह के कैंसर (Oral Cancer) के सामने आते हैं। यह दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में बहुत अधिक संख्या है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अधिकांश मरीज तब अस्पताल पहुँचते हैं जब बीमारी काफी उन्नत अवस्था (Stage III या IV) में पहुँच चुकी होती है, जिससे इलाज की सफलता दर काफी कम हो जाती है।
मुँह का कैंसर केवल एक बीमारी नहीं है, बल्कि कई बार यह सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक आदतों का परिणाम होता है। अच्छी खबर यह है कि अधिकांश मामलों में शुरुआती अवस्था में पकड़ में आने पर यह कैंसर बहुत अच्छी तरह ठीक हो सकता है और 5 वर्षीय उत्तरजीविता दर 80–90% तक पहुँच सकती है।
आइए विस्तार से समझते हैं कि मुँह का कैंसर क्या है, यह क्यों होता है, इसके लक्षण क्या हैं और इसे कैसे रोका जा सकता है।
मुँह का कैंसर क्या है?
मेडिकल भाषा में ओरल कैंसर उस घातक (मैलिग्नेंट) ट्यूमर को कहते हैं जो निम्नलिखित क्षेत्रों में उत्पन्न होता है:
- होंठ (Lips)
- जीभ (Tongue) – विशेषकर जीभ का किनारा (Lateral border) सबसे आम स्थान
- मुँह का फर्श (Floor of mouth)
- गालों की भीतरी सतह (Buccal mucosa)
- मसूड़े (Gingiva/Alveolar ridge)
- तालु (Hard palate & Soft palate)
- ओरोफैरिंक्स का हिस्सा (Oropharynx) – विशेषकर टॉन्सिल क्षेत्र, वेल ऑफ टंग (Base of tongue) और पीछे का गला (Posterior pharyngeal wall)
भारतीय संदर्भ में सबसे अधिक मामले होंठ और जीभ से कम होते हैं, जबकि गालों की भीतरी सतह (Buccal mucosa) और मसूड़ों का कैंसर बहुत आम है, जो विश्व स्तर पर भारत में सबसे ज्यादा देखा जाता है।
मुँह के कैंसर के प्रमुख कारण और जोखिम कारक
भारत में ओरल कैंसर के 80–90% मामले निम्नलिखित कारकों से जुड़े होते हैं:
| क्रमांक | जोखिम कारक | अनुमानित योगदान (%) | भारत में प्रचलन |
| 1 | तंबाकू (धूम्रपान + चबाने वाला) | 70–85% | बहुत अधिक |
| 2 | सुपारी (Areca nut) + चबाने वाली चीजें | 60–80% | अत्यधिक |
| 3 | शराब (Alcohol) | 20–40% (अकेले) | मध्यम से उच्च |
| 4 | तंबाकू + शराब का संयोजन | 80–95% | बहुत अधिक |
| 5 | मानव पैपिलोमा वायरस (HPV – विशेषकर प्रकार 16) | 20–35% (विकसित देशों में अधिक, भारत में अभी कम लेकिन बढ़ रहा) | बढ़ता हुआ |
| 6 | पुरानी यांत्रिक जलन (लूज डेन्चर, टूटी दाँत) | 5–15% | मध्यम |
| 7 | लंबे समय तक चलने वाली प्री-कैंसरस स्थितियाँ | 10–30% | सामान्य |
| 8 | खराब मौखिक स्वच्छता, पोषण की कमी | सहायक कारक | सामान्य |
सबसे महत्वपूर्ण कारण – तंबाकू और सुपारी
भारत में चबाने वाले तंबाकू (Gutka, Khaini, Zarda, Paan masala with tobacco, मिश्री, गुटखा, पान, सुपारी आदि) ओरल कैंसर का सबसे बड़ा एकल कारण है।
गुटखा और पान मसाला में मौजूद Arecoline (सुपारी का मुख्य अल्कलॉइड) डीएनए को नुकसान पहुँचाता है, मुंह की कोशिकाओं में तेजी से विभाजन करवाता है और फाइब्रोसिस (Oral Submucous Fibrosis – OSMF) का कारण बनता है।
प्री-कैंसरस स्थितियाँ (Pre-cancerous Conditions) – चेतावनी संकेत
ये वे स्थितियाँ हैं जो कैंसर में बदल सकती हैं। इन्हें समय पर पहचानना बहुत महत्वपूर्ण है:
- Oral Submucous Fibrosis (OSMF)
- मुंह खोलने में कठिनाई
- जीभ, गालों में जलन
- सफेद धब्बे/रेशेदार पट्टियाँ
- कैंसर में बदलने की संभावना: 7–13%
- Leukoplakia (सफेद धब्बा जो खुरचने पर नहीं जाता)
- सबसे आम प्री-कैंसरस स्थिति
- कैंसर में बदलने की संभावना: 0.5–40% (स्थान और प्रकार पर निर्भर)
- Erythroplakia (लाल धब्बा)
- सबसे खतरनाक प्री-कैंसरस स्थिति
- कैंसर में बदलने की संभावना: 50–90%
- Lichen Planus (विशेषकर एरोज़िव प्रकार)
- Palatal changes (Reverse smoking करने वालों में)
मुँह के कैंसर के प्रमुख लक्षण एवं चेतावनी संकेत
ज्यादातर शुरुआती चरणों में कोई दर्द नहीं होता। इसलिए निम्नलिखित संकेतों पर विशेष ध्यान दें:
सबसे महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत (2 सप्ताह से अधिक रहने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ):
- मुंह में सफेद या लाल धब्बा जो खुरचने पर न जाए
- मुंह में गैर-उपचारित घाव/छाला (Non-healing ulcer > 2 weeks)
- जीभ या होंठ पर गांठ/सख्त उभार
- मुंह खोलने में कठिनाई (Trismus)
- गर्दन में गांठ (Lymph node enlargement)
- लगातार गले में खराश या निगलने में तकलीफ
- अनियंत्रित मुंह से खून आना
- आवाज में बदलाव (विशेषकर टॉन्सिल/बेस ऑफ टंग कैंसर में)
- एक तरफ से लगातार कान में दर्द (Referred otalgia)
- अनियंत्रित वजन कम होना
सामान्य लक्षण जो बाद के चरण में दिखते हैं:
- मुंह से दुर्गंध (खराब सांस)
- दाँत ढीले होना बिना किसी स्पष्ट कारण के
- जबड़े का दर्द या सूजन
- चेहरे/गाल पर असममित सूजन
निदान कैसे होता है?
- क्लीनिकल परीक्षण – सबसे महत्वपूर्ण पहला कदम
- टॉल्यूडिन ब्लू स्टेनिंग – सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध
- बायोप्सी – सुनहरा मानक (Gold standard)
- ओरल ब्रश साइटोलॉजी (कुछ केंद्रों में)
- इमेजिंग – CECT neck, MRI, PET-CT (स्टेजिंग के लिए)
रोकथाम – सबसे प्रभावी हथियार
| रोकथाम का स्तर | उपाय | प्रभावकारिता |
| प्राथमिक रोकथाम | तंबाकू, गुटखा, सुपारी, शराब का पूर्ण त्याग | बहुत उच्च |
| द्वितीयक रोकथाम | नियमित स्व-मुंह परीक्षण (Self Oral Examination) | उच्च |
| द्वितीयक रोकथाम | 30 वर्ष से अधिक आयु वालों का साल में कम से कम एक बार ओरल कैंसर स्क्रीनिंग | उच्च |
| तृतीयक रोकथाम | प्री-कैंसरस लेसियन का समय पर उपचार | मध्यम-उच्च |
| सहायक उपाय | अच्छी मौखिक स्वच्छता, संतुलित आहार, फल-सब्जियों का अधिक सेवन | मध्यम |
स्व-मुंह परीक्षण कैसे करें? (Self Oral Examination – 5 मिनट की प्रक्रिया)
- उज्ज्वल रोशनी के सामने बड़े दर्पण के सामने खड़े हों
- होंठ ऊपर-नीचे करके देखें
- गाल बाहर की तरफ खींचकर अंदरूनी सतह देखें
- जीभ को बाहर निकालकर हर तरफ से देखें
- जीभ को ऊपर उठाकर नीचे का हिस्सा देखें
- मुँह का फर्श (फर्श पर उंगली से छूकर देखें)
- गालों, मसूड़ों, तालु को ध्यान से देखें
- गर्दन को छूकर गांठों की जाँच करें
भारत में स्थिति और चुनौतियाँ (संक्षेप में)
- भारत विश्व में ओरल कैंसर के सबसे अधिक मामलों वाला देश
- पुरुष:स्त्री अनुपात लगभग 4:1
- औसत आयु 55–60 वर्ष, लेकिन 30–45 वर्ष की उम्र में भी तेजी से बढ़ रहा
- ग्रामीण क्षेत्रों में >70% मामले देर से डायग्नोज़ होते हैं
- जागरूकता बहुत कम (केवल 15–25% लोग शुरुआती लक्षणों को जानते हैं)
अंतिम शब्द
मुँह का कैंसर भारत में एक ऐसी बीमारी है जिसका अधिकांश भाग रोका जा सकता है।
अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य तंबाकू/गुटखा/सुपारी/पान मसाला का सेवन करता है तो आज ही त्यागने का संकल्प लें।
अगर मुंह में 2 सप्ताह से अधिक समय से कोई असामान्य परिवर्तन (सफेद/लाल धब्बा, घाव, गांठ) दिख रहा है तो तुरंत किसी ENT सर्जन, ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन या कैंसर विशेषज्ञ से संपर्क करें।
याद रखें:
शुरुआत में पकड़ा गया मुँह का कैंसर लगभग ठीक हो जाता है।
देर से पकड़ा गया मुँह का कैंसर बहुत कठिन और महंगा इलाज मांगता है।
अपने मुँह की जाँच स्वयं करें।
तंबाकू छोड़ें।
अपने प्रियजनों को जागरूक करें।
संदर्भ:
- National Health Mission, Ministry of Health & Family Welfare, Government of India
Oral Cancer Screening & Early Detection Guidelines
https://nhm.gov.in/images/pdf/programmes/NCD/Oral_Cancer_Guidelines.pdf - ICMR – National Centre for Disease Informatics and Research
Report of National Cancer Registry Programme 2020
https://www.ncdirindia.org/ncrp/annual_report.aspx - Tata Memorial Hospital – Department of Preventive Oncology
Oral Cancer Prevention & Early Detection Manual (2023–2024 edition)
https://tmc.gov.in/preventive-oncology
नोट: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ़ जानकारी के लिए है। कोई भी इलाज शुरू करने या लाइफस्टाइल में कोई भी बदलाव करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।
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